The need for practical knowledge, sex education and moral values

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Due to the increasing influence of social media and internet our youth has got a lot of exposure to western countries in the last decade. However, they have not received the required practical knowledge and sex education from their homes and educational institutions.
Some incidents related to harassment of Women in Jaipur and Bangalore have been in the news recently.
Usually such incidents related to harassment of women are blamed on the twisted mentality of men. But this is not always true. Many times, such incidents are also instigated by women as blackmail. The recent incident in jaipur is such an example
In the last decade, due to the increasing influence of social medial and interest our youth has got a lot of exposure to western countries. However, they have no received the required practical knowledge and sex education from their homes or educational institutions. Talking about such topics is considered to be against the Indian culture.
while we observe western culture and openness easily, we are quiet about sex education in our homes and educational institutions. Everyone seems to be overwhelmed with so much exposure and are unable to understand how to stop these incidents of sexual harassments.
It seems shameful that such incidents are happening in the land of Ram, Krishan, Buddha, Mahavir and Gandhi. The entire world is becoming a marketplace due to globalization. If we analyze the reason for this twisted mentality of the society, we’ll find that the reason is not just internet, social media or technological development but the lack of sex education and wrong parenting . Both girls and boys are exposed to western culture and openness. They are all getting influenced. If we look at the state of higher education in our universities and college, their syllabus does not include moral education. we can’t even expect them to include practical or human value based education.
If we want to safeguard our homes and our youth, we need to take steps to include sex education, practical knowledge, yoga and value based education while parenting at home. As a part of education in schools and college, we shall be able to create a healthy environment as per our great culture and tradition.
The season is changing after Lohri and Makar Sakaranti. These changes bring good opportunities. We all can take this opportunity to develop a better society based on love, harmony, equality and respect towards women, Mothers, daughters and sisters who represent love, forgiveness and human values in a society. A society which respect these value will become a happy and prosperous society.
With love, respect and best wishes,

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अध्यापन एक सरल कार्य नहीं है।

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आइए! हम कुरूक्षेत्र के दृष्य को याद करते हैं, जहाँ संसार के परम गुरू श्री कृष्ण एक अनुभवी व्यक्त्ति दुर्योधन को समझाने और सिखाने का महत्त्वपूर्ण प्रयास करते हैं, परंतु पूर्णतः सफल नहीं हो पाते। श्री कृष्ण कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र को भी समझाने में सफल नहीं हो पाए।
यही वर्तमान में हमारे साथ भी हो रहा है, जब हम दूसरों को समझाने का प्रयास करते हैं, किन्तु सफल नहीं हो पाते हैं। न तो हम उन्हें समझा पाते हैं, न हम इस असफलता का कारण समझ पाते हैं।
अतः प्रष्न यह उठता है कि हम हमारे समक्ष उपस्थित व्यक्त्ति को क्यों नहीं समझा पाते हैं और वह व्यक्त्ति समझने में क्यों सक्षम नहीं होता। यह समझना अति आवष्यक है और दूसरों को समझाना भी। किन्तु दोनों ही अत्यंत कठिन कार्य हैं। आप देखेंगें कि एक बीज को उगने के लिए उपयुक्त वातावरण आवष्यक होता है। एक बीज को बोने का एक उचित समय होता है। जब बीज को विषेष तापमान, प्रभावषाली वातावरण, समुचित जल की उपलब्धि होती है तभी वह अंकुरित होंगा और एक वृक्ष के रूप में अभिवृद्ध होगा। बीज बोने के बाद यदि अत्यंत भारी वर्षा हो जाती है तो यह संपूर्ण बीज को नष्ट कर देगी। इस स्थिति में क्या करना चाहिए? हमें उचित समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए और तब तक प्रयास करते रहना चाहिए जब तक हम उचित वातावरण प्राप्त नहीं कर लेते।
अध्यापन एक सरल कार्य नहीं है। यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण और कठिन कार्य है। अध्यापकों को न केवल पुस्तक से बल्कि स्वयं एक उदाहरण बनकर पढ़ाने एवं सिखाने के लिए निरन्तर प्रयास करना चाहिए। अध्यापकों से विद्यार्थी प्रेेम ओर स्नेह की अपेक्षा करते हैं। वे अध्यापक के मात्र आंतरिक सौन्दर्य की प्रषंसा करते है और उसी से सीखते भी हैं।
एक षिक्षक अपने स्नेहपूर्ण एवं संरक्षणपूर्ण व्यवहार से आकर्षक बनता है न कि बाह्य रूप से। सौंदर्य आंतरिक होता है, यदि आप आंतरिक रूप से अच्छे हैं तो यह आपकी अच्छी प्रवृति को दर्षाता है। इसीलिए 70 वर्ष की आयु में भी आपके दादा-दादी का व्यक्तित्व आपको बहुत आकर्षक लगता है।
इसी कारण पूर्व राष्ट्रपति प्रो. अब्दुल कलाम आजाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मदर टेरेसा जैसे महान व्यक्तित्व भी हमारी दृष्टि में सुंदर हैं क्योंकि ये सभी विनम्रता से परिपूर्ण हैं। किसी महान व्यक्ति का आंतरिक सौंदर्य हमें अत्यधिक ऊर्जावान एवं सकारात्मक बना देता है। इस आंतरिक सौंदर्य को कैसे विकसित किया जाए? इसका एक ही तरीका है -‘धन्यवाद‘ कहना । जितनी बार जितने अधिक लोगोें को आप धन्यवाद कह सके, कहिये और अपने मन को सुंदर बनाइये। जब कभी आप महसूस करें कि आपकी गलती है तुरन्त ‘क्षमा मांगिए। कभी-कभी तब भी क्षमा मांगिए जब आपने कुछ भी गलत नहीं किया। आपका ‘क्षमा’ शब्द (Sorry) जीवन की कई समस्याएं सुलझा सकता है। यह आपको अधिक विनम्र बनाएगा। यह आपके व्यक्तित्व को अधिक गरिमामय बनाएगा और आपके मन को सौंदर्य प्रदान करेगा।

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Devotion is the source of Completeness

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Devotion is essential for every human being. This is the most important part of an individual’s life because it makes him free from all his guilt, frustration, sorrows and irritation. Devotion is the only thing that helps an individual to meet his own self. Devotion makes our thoughts unite with others as well as with the supreme energy. Unity is the most important part of human life. We can be united and be complete in our lives only through this pious act. There is a lot of input of information in our lives but hardly, it is used because the information gets stuck at a certain level of our thoughts. What career we choose after 12th graduation

For the best use of knowledge, there is the need of continuous flow of knowledge, where input and output should be balanced to keep the life smooth. Women are more devoted living beings on the earth. They are grateful towards God and they possess a pure heart. Meera from Merta city was the greatest devotee of Lord Krishna who in every negative situation came closer to God. We can learn a lot from this great devotion of Meera. Let’s show our gratitude towards nature and the ultimate power through this pious Mantra:
Mukund Madhava Govind Bol,
Keshav Madhava Hari Hari Bol
Let’s unite ourselves with the universe and chant this Mantra to make our hearts pure. It is very important to understand and imbibe the meaning of this Mantra.

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योग चैतन्य अवस्था में जीने का मार्ग है।

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योग जीवन को सरल और खुशहाल बनाने का महत्त्वपूर्ण साधन है। हम दैनिक जीवन में योगक्रिया अपनाकर मानसिक रूप से प्रसन्न और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। आइए! आज योग दिवस पर स्वयं के लिए तीन वचन लेते हैं-
1. हम प्रातःकाल कम से कम 2 ग्लास पानी पिएंगें।
2. हम प्रतिदिन सुबह 3 से 5 मिनट व्यायाम करके प्राणायाम करेंगें।
3. हम कुछ समय प्राकृतिक वातावरण में छत पर, पार्क में अवष्य व्यतीत करेंगे और ईष्वर को इस शुभ दिन के लिए धन्यवाद देंगे।
मेरे अनुभव के अनुसार, मैं आपको आष्वस्त करता हूँ कि यह सब करने के बाद आपका एक भी दिन नकारात्मक नहीं जाएगा। योग का तात्पर्य है ‘जुड़ना’- अपनी आत्मा का परम आत्मा से जुड़ना, पूर्ण चेतना के साथ कार्य करना। सदैव चैतन्य अवस्था में रहने के कारण एक योगी किसी के साथ कभी बुरा व्यवहार नहीं कर सकता। अतः चैतन्य प्राप्ति हेतु स्वयं के लिए समय निकालिए। योगी बनिए, स्वयं से प्रेम कीजिए। यदि आप स्वयं से प्रेम करेंगे तो आप दूसरों से प्रेम कर पाएंगें। आप दूसरों की निःस्वार्थ सेवा कर पाएगें। अतः सादा जीवन अपनाइये जिससे आपके विचार स्वतः ही उच्च हो जाएंगे और दूसरों की निःस्वार्थ सेवा कर पाएंगे। याद रखिए, योग हमें सिखाता है- ‘‘सादा जीवन उच्च विचार’’। आइए! योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ।

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चाणक्य के मूल्यवान सिद्धान्त

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महान विद्वान चाणक्य ने कुछ मूल्यवान सिद्धान्त दिए थे जो कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अच्छे मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। आइए! आज हम चाणक्य के कुछ बहुमूल्य सिद्धान्तों की चर्चा करते है और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।
प्रथम सिद्धान्त- संघर्ष में विजय प्राप्ति हेतु आपके लिए आवश्यक है –
1 दृढ़ संकल्प
2 पहले से ही पूर्णतः तैयार हो जाना
3 इच्छा शक्ति जो किसी भी संघर्ष में विजयी होने के लिए अपरिहार्य एवं पर्याप्त साधन है।
दूसरा सिद्धान्त- सफलता प्राप्ति हेतु आपके लिए आवष्यक हैः-
4 चमत्कारिक शब्दों में आस्था रखना। किन्तु दूसरों के मत या बातों में बिना विचारे विष्वास मत कीजिए पवित्र ग्रंथों या गुरूओं के द्वारा ऐसा ही बोला गया है। केवल उसी पर विष्वास कीजिए जो आपने अनुभव किया है, जो तार्किक है, जो आपके द्वारा पूर्ण परीक्षित है और जो मानवता के लाभार्थ हो और जो अधिक लोगों के लिए प्रसन्नता ला सकें।
जीवन में प्रसन्नता अत्यंत आवष्यक है। यदि यह सिद्धान्त सार्वभौमिक रूप से श्रेष्ठ है तो यह अवष्य स्वीकार किया जाना चाहिए।
तीसरा सिद्धान्त- विफलता के भय से मुक्ति पाने हेतु आपके लिए आवष्यक है-
5 एक अच्छी योजना का निर्माण और अपनी योजना पर पूर्ण विष्वास रखना। यदि योजना श्रेष्ठ है तो निर्णय भी श्रेष्ठ होगा। तीव्र आस्था और समर्पण से युक्त श्रेष्ठ योजना असंभव को संभव में रूपान्तरित कर सकती है। आषावादी प्रत्येक परिस्थिति में संभावना ढ़़ँूढ़ लेता है। निराषावादी प्रत्येक परिस्थिति में विफल होता है। सफलता और विफलता व्यक्त्ति की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। आइए! अपनी शक्ति का पूर्ण प्रयोग करें। आइए! संभावनाआंे से युक्त बनं।
श्रेष्ठ विचारों के द्वारा हम श्रेष्ठ कार्य कर सकते हैं। एक श्रेष्ठ षिक्षक कई विद्यार्थियोें में परिवर्तन ला सकता है। एक उचित शैक्षिणिक वातावरण के लिए हमें रचनात्मक बनना चाहिए। श्रेष्ठ विचार ही हमारे लिए श्रेष्ठ वातावरण का निर्माण करते हैं। हम चाणक्य के समान एक आत्मविष्वासी षिक्षक बन सकते हैं और अपने षिक्षण को प्रभावी बना सकते हैं, यदि हम निम्नलिखित बातें अपने जीवन में अपनाते हैं-
 शिक्षण की समुचित तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण है।
 पाठ्य सामग्री पहले से ही समुचित रूप से तैयार कर लेनी चाहिए।
 शिक्षण प्रक्रिया में परिवर्तन हेतु उचित पद्धति अत्यंत आवष्यक है।
 आपका अपने विषय पर प्रगाढ़ नियंत्रण हो।
 आप आत्मविष्वास से युक्त हो।
 आप में साहस और अधिकारपूर्वक ज्ञान वितरण करने की पूर्ण क्षमता हो।
 आपके विचार मौलिक हांे जिन्हें रचनात्मक रूप से समझना संभव हो।
श्रद्धा अत्यंत शक्तिषाली है। यदि आप स्वयं को एवं अपने विद्यार्थियों को जानते हैं तो आप अपना शत प्रतिषत दे पाएंगें। विद्यार्थियों की मानसिकता को समझना अतिआवष्यक है। चाणक्य उन महान षिक्षकों में से एक है, जिन्होंने अपने षिष्यों को प्रभावी व आत्मविष्वासपूर्वक ज्ञान व निर्देषन प्रदान किया। हम उनके सिद्धांतों से सीखकर एक सफल षिक्षक बन सकते है। षिक्षक संपूर्ण समाज को रूपांतरित कर सकते है। यह संभव है यदि हमारे मस्तिष्क के प्रयोग द्वारा आत्मविष्वासपूर्वक अधिकाधिक ज्ञान का उद्भव हो। षिक्षकों में उत्साह, इच्छा शक्ति और दिए गए पाठ्यक्रम से अधिक प्रदान करने की मंषा होनी चाहिए।

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Motivational Guru – Dr. Sanjay Biyani

A dynamic multifaceted young educationist, youth motivator,  author and an entrepreneur with over 22 year of teaching experience at PG and UG level. The far reaching objectives is to empower women and youth through technical education and believes that there is tremendous scope in each and every youth with hidden potential talent which can be explored through proper counseling.

Dear Aspirants of success,

Please do not think for a moment that I’m one of those motivational Guru/writers who have always been chaired on high pedestals and lettering inspirational quotes and anecdotes for people while never trenching and experiencing the arduous ways of the world. But I am one of those people from among the common masses who have risen to heights after facing the grueling heat of the world and running the rate face for long.

I have seen many people in my life who are sick and tired of struggling to make ends meet, who read a bunch of Motivational Books and still find themselves kind of depressed, who have great ideas in their heads but are scared to death to step out and strike it on your own. My success mantra in life has been inspired by focused actions! That’s it. You see, I don’t believe you came across this book by mere chance or accident. It is said that coincidence is God’s way of staying anonymous.

Look at today’s date and time. It could well be the turning point in your life.

Kipling once said that, words are “the most powerful drug used by mankind.”

So go ahead, Get Enlightened ! Encouraged ! and Elated!

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Improve Your Today than Yesterday

Might you want to construct a superior tomorrow? The best approach to do that is extremely basic. Attempt this strategy – make it a propensity to improve today than yesterday. Attempt to make the day before you only somewhat superior to the day that has recently passed. Doing this is not troublesome by any stretch of the imagination. Before long it will end up being a propensity. As it turns into a propensity, you will have the capacity to improve your today than yesterday. Consider it.

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What happens when tomorrow comes? At the point when tomorrow turns out to be today and you are attempting to improve it than yesterday, you are unquestionably constructing a superior tomorrow. It’s an exceptionally straightforward rationale yet individuals don’t comprehend it. Attempt it. Take a stab at improving your today than yesterday and afterward you will end up building a superior tomorrow.

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A dynamic multifaceted young educationist, youth motivator, author and a entrepreneur with over 22 year of teaching experience at PG and UG level. The far reaching objective is to empower women and youth through technical education and believes that there is tremendous scope in each and every youth with hidden potential talent which can be explored through proper counseling.

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