प्रेम एक चमत्कारिक एवं सार्वभौमिक शब्द है।

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अपनी प्रत्येक सुबह को आनन्दमय बनाइए। प्रतिदिन इसका स्वागत जोषपूर्ण होना चाहिए। हमें जीवन के प्रत्येक पल का आनन्द लेना चाहिए। जीवन का महत्वपूर्ण तत्त्व आपसी ’संबंध’ है। जो कि व्यक्ति में उत्साह एवं ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाते है, ऐसा तभी होता है जब पारस्परिक संबंध प्रेमपूर्ण एवं निःस्वार्थ हों। षिक्षक-विद्यार्थी संबंध एक सम्मानीय और प्रेमपूर्ण संबंध है। अध्यापन कार्य विद्यार्थी केन्द्रित होना अत्यन्त आवश्यक है, जो शिक्षक का विद्यार्थी के प्रति अगाध प्रेम दर्षाता है।
प्रेम सार्वभौमिक शब्द है। प्रेम चमत्कारी है। प्रकृत्ति हमें बिना किसी शर्त के प्रेम करती है। वर्षा हमें बिना किसी शर्त के प्रेम करना सिखाती है। यह प्रत्येक जीव को समान रूप से जल प्रदान करती है, प्रत्येक खेत में समान रूप से जल-वर्षा करती है। पृथ्वी हमें समान रूप से अन्न प्रदान करती है । पवन सभी स्थानों पर समान रूप से बहती है। ये सभी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करतेे। सम्पूर्ण ब्रम्ह्ाण्ड प्रत्येक जीव को सार्वभौमिक रूप से बिना किसी जाति, वर्ग और धर्म संबंधी भेदभाव के प्रेम करता है।
दूसरों के प्रति दयाभाव रखिए। एक अच्छा सामाजिक संगठन बनाने का प्रयास कीजिए। जितना अधिक आप दूसरों को महत्व देंगे उतने ही अधिक मूल्यवान संबंध आप प्राप्त करेंगे। आप दूसरों को नहीं बदल सकते, आप स्वयं को ही बदल सकते हैं। लोगों की खुलकर प्रषंसा कीजिए। कृतज्ञ बनिए। प्रतिदिन नई बातें सीखिए। स्वयं में तथा ईष्वर में विष्वास रखिए।
संसार का एक सार्वभौमिक नियम है। जितना अधिक आप देते हैं, उतना अधिक आप प्राप्त करते हैं। किन्तु देने के पीछे मात्र षर्तहीन प्रेम का उद्देष्य होना चाहिए। इसके लिए आपको किसी भी प्रकार के लाभ की प्राप्ति के बारे में सोचे बिना निरन्तर देते रहने का भाव रखना होगा। मात्र इसी आधार पर आप मूल्यवान संबंध विकसित कर सकते है, जो लंबे समय तक चल पाएंगे और आपको कभी पछताना नही पड़ेगा।

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